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Wednesday, September 16, 2009

शुक्रिया

आप सभी का बहुत-बहुत शुक्रिया। आपको PDF उपहार पसंद आया और आपने इसकी सराहना की, इसके लिए गंगू तेली आपका शुक्रगुजार है...। कुछ ब्लॉगर साथियों ने इस तरह की सामग्री नियमित रूप से उपलब्ध करवाते रहने का आग्रह किया है, तो हम अवश्य ही इसके लिए प्रयास करते रहेंगे।
गंगूजी की तेल-मण्डली के अन्य साथियों से भी इसके लिए सहयोग ले रहे हैं, लेकिन जैसा कि कुछ साथी इसे सीधे ब्लॉग पर अटैच करने को कह रहे हैं, तो हमारा निवेदन इतना ही है कि ब्लॉग पर इतनी बड़ी फाइल जोड़ पाना मुश्किल है। गंगू तो आपकी सेवा में हाजिर है ही... आप जब चाहें, चिराग रगड़ दीजिए... बंदा खिदमत में पहुंच जाएगा। फिर भी इसके लिए भी हम कुछ तकनीकी जानकार तेलियों की मदद अवश्य लेंगे और संभव हुआ तो भविष्य में इसे आप तक सीधे ब्लॉग के जरिए ही पहुंचाएंगे। ई-मेल का झंझट नहीं रखेंगे....। ब्लॉग का कलेवर भी जल्द ही कुछ नया और अच्छा करने का प्रयास करेंगे।
रही बात.... गंगू तेली को देश भर की खबरों तक ले जाने की, तो यह बात हमारे मन में भी चल रही है। तेल मण्डली इस ओर प्रयास कर रही है, लेकिन फिलहाल हमारा पूरा फोकस राजस्थान पर ही है। इस पर भी हम रोजाना नहीं लिख रहे। इसकी वजह सिर्फ इतनी है कि आपको कुछ भी पढ़ाना तो सरासर ना-इंसाफी होगी। जो अच्छा है, उचित है, वही गंगू तेली की जुबानी आप तक पहुंचे, यही सद्भाव है। फिर भी आपको निराश नहीं करेंगे। अपना फलक बढ़ाने की दिशा में भी हमारा प्रयास जारी रहेगा। आपका इतना प्यार मिल रहा है.... शुक्रिया!

Monday, July 6, 2009

कुण्डली (कविता)

गंगूजी-तेली कहे, सुनिए राजा भोज ।
जब निकलेगा तेल, तब होगी सबकी मौज ॥
होगी सबकी मौज, तभी तो मंत्री-चाकर ।
झांक रहे कुओं में, आंखें फाड़े जाकर ॥
कह 'गंगू' कविराय, बोलते बम-बम बेली ।
तेल-तेल की माला जपते सारे तेली॥
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