Wednesday, September 16, 2009
शुक्रिया
Thursday, September 3, 2009
मारवाड़ में 'मंगल-गान'
धरती के गर्भ में करीब डेढ़ हजार मीटर की गहराई पर छुपे खनिज तेल के साथ प्रदेश में खुशियों और खुशहाली की धार भी फूट पड़ी। बाड़मेर के नागाणा स्थित मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल में देश के प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहनसिंह ने मंगला तेल कूप से व्यावसायिक तेल दोहन की शुरुआत की। इस अवसर पर केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा, केन्द्रीय मंत्री सी.पी. जोशी, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, केयर्न इण्डिया के चेयरमैन बिल गैमिल और सीईओ राहुल धीर भी मौजूद थे।12.34 पर 'मंगल'...
मंगला कुए से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट पर जैसे ही तेल की पहली बूंद निकली, माहौल अनूठे रोमांच से लबरेज हो गया। लोग जहां तालियां बजाकर खुशी का इजहार कर रहे थे, तो कई आंखें खुशी के मारे छलक आईं। मंगला तेल कूप से निकली पहली बूंद प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहनसिंह को भेंट की गई।
नए युग का आगाज
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि तेल उत्पादन के बाद राजस्थान की गरीबी दूर होगी और खुशहाली तेजी से आएगी। उन्होंने दुनिया के अन्य हिस्सों के पूंजीपतियों को भी भारत में निवेश का आमंत्रण दिया और कहा निवेशकों को हर तरह की सहूलियत देने का विश्वास दिलाया।
Monday, August 24, 2009
खुशखबरी : 29 से शुरू होगा तेल दोहन
Wednesday, August 5, 2009
कहीं 'मामू' तो नहीं बना रहे
पता है? राजाजी तो प्यार से कहते हैं, पर जनाब इन तेल निकालने वालों ने तो हमको सचमुच में ही मूर्ख समझ रखा है। चौथाई साल से तो राजस्थान को ही नहीं पूरे देश को 'मामू' बना रहे हैं।
'भाई-लोगों' ने पहले-पहल बात उछाली कि मई के महीने से थार के धोरे तेल उगलने लगेंगे। यह खबर सुनते ही पप्पू पहलवान से लेकर चंपू चोर तक सब खुश हो गए। अपने बिरादर 'तेलियों' ने भी जमकर तालियां बजाई। करोड़ो आखों ने ख्वाब सजाए और रूखे राजस्थान में 'चिकनाई' का जश्न मनाया गया। 'अपने-राम' तेल निकलने वाली जगह के आसपास में गांव-वालों से बतियाए तो वहां भी लोगों के चेहरे पर नूर नजर आया, लेकिन बात सुसुरी बात ही रह गई। मई के चारों के चारों हफ्ते सूखे गुजर गए। यकीन जानिए सा'ब, सबको बड़ी निराशा हुई। अपने-राम ने भी सोचा कि यार... इस कदर तो सावन भी बेवफाई नहीं करता। भले ही धोरों वाली धरती से उसका पुराना वैर है, पर वार-त्योहार में दो-चार बार तो 'बरखा-रानी' को भेज ही देता है। मगर तेलवालों ने तो झट से 'ठेंगा' दिखा दिया। आखिर अपन ने भी मन को समझाया कि भाई-
कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, यूं ही कोई बेवफा नहीं होता ॥
बाद में पता चला कि सूबे की सरकार के साथ वैट का मामला अटक गया है। बड़ा भारी रोड़ा है। कम्बखत 'क्रेन' से हटाना पड़ेगा। 'सेटिंग' चल रही है और जल्द ही सब ठीक हो जाएगा। ...सो, अपन ने तो मास्टर चम्पालाल की पाठशाला में पढऩे वाले तीसरी क्लास के बच्चे की तरह मुंह पर उंगली रख दी। पूरा जून खामोशी में बिता दिया। लोग कहते रहे- जून में तेल दोहन शुरू हो जाएगा। जून आखिर तक तो पक्का। सोलह आना देख लेना। पर महीने बीत गया और हुआ वहीं, जो पिछले महीने में हुआ था। अब 'अपने-राम' ने तेल वालों से पूछा तो बोले- हमने कब कहा था कि मई-जून से तेल निकालेंगे। ये तो भइयै खबरचियों के कयास हैं। हमारा 'टारगेट' तो तीसरी तिमाही से शुरू करने है। अपन ने ऊंची कुर्सियों वालों भी पूछा, लेकिन अपन ठहरे मामूली आदमी। अव्वल तो 'साहब लोगों' ने जवाब ही नहीं दिए। गलती से कुछ बोले भी तो ऐसा घुमा-फिराकर कि उसका अर्थ 'गंगू तेली' तो क्या साक्षात 'राजा भोज' भी नहीं समझ सके। खैर, बातों-बातों में जुलाई का महीना भी लग गया। अबके थोड़ी आस बंधी। लगा कि अब तो 'टारगेट' वाला 'टाइम' भी शुरू हो गया। भाई-लोग कह रहे हैं कि हमने तैयार पूरी कर रखी है। बस 'नल' खोलने भर की देरी है, तो अबकी दफा तो कुछ हो ही जाएगा, लेकिन हुजूरे-आला तीसरी तिमाही का पहला महीना भी ऐसे ही फुर्र हो गया, जैसे बाकी के हुए थे। पर, इसके बाद 'बड़े लोगों' ने अपना लेखा-जोखा शेयर बाजार में सुनाया। रुपयों की जोड़-बाकी गिनाई। तरक्की के ख्वाब दिखाए। तेल निकालने वाली कम्पनी के सबसे बड़े 'बाबूजी' ने राजस्थान से तेल दोहन शुरू करने की मुनादी करवाई और अगस्त का महीना ऐलान कर दिया। 'बाबूजी' गोरे मालिकों की जुबानी बोले- राजस्थान की धरती से तेल निकालना हमारे लिए मील का पत्थर साबित होगा।
'बाबूजी' की बात सुनकर अपन को भी खूब 'हरष' हुआ, सो बड़े तेलियों से पूछा कि- भाईसा, अगस्त के महीने में तो सुसुरे तीस दिन होवै हैं। अपने हिस्से कौनसा दिन आवैगा? भाईसा ने भी हौले से कहा- देख गंगू, अभी तो अगस्त की बात कही है, पर वैट वाले रोड़े की 'सेटिंग' अभी भी बैठी नहीं है। अब होने को तो इसी महीने में ले-देकर मामला 'फिट' हो जाए, पर ना हुआ तो यह महीना भी सूखा जा सकता है। इसलिए ज्यादा दिमाग मत दौड़ा बावळे...!
फिर कमर पे धौल धरते हुए भाईसा ने खीसें निपोर दीं- हें-हें-हें, तू भी पूरा मामू है रे गंगू। अब आप ही कहिए हुजूर, अपने कहने को क्या रह गया था? सो मामूली आदमी की तरह चुप हो गए। वैसे भी साहब, इन 'कॉरपोरेट' लोगों को 'ऑपरेट' करना अपने-राम को कहां आता है.....
Tuesday, August 4, 2009
'तेल की नौकरी' में ठगी का खेल!!!
दो रोज पहले राजस्थान के एक बड़े अखबार राजस्थान पत्रिका में खबर छपी- 'तेल की नौकरी' में ठगी का खेल!!! खबरचियों ने लिखा कि :-
अगर आप किसी नामी तेल-गैस कम्पनी से नौकरी का बुलावा पाकर खुश हैं, तो संभल जाइए। यह प्रस्ताव किसी बड़ी ठगी का हिस्सा भी हो सकता है। तेल-गैस उत्पादन में प्रगति के साथ ही इस क्षेत्र में नौकरी का झांसा देकर रुपए ऐंठने वाला गिरोह भी सक्रिय हो गया है। विदेशी धरती पर बैठे इस गिरोह के सरगना इंटरनेट के जरिए पूरे देश में जड़ें फैला रहे हैं। मारवाड़ तक भी इनकी पहुंच हो चुकी है। राहत की बात यह है कि फिलहाल इनके झांसे में फंसने का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन जोधपुर सहित संभाग के बाड़मेर एवं जालोर जिले में कई युवाओं को ऐसे फर्जी बुलावा पत्र (कॉल लैटर्स) एवं अनुबंध पत्र (कॉन्ट्रैक्ट लैटर) ईमेल से मिले हैं।
Thursday, July 30, 2009
अगस्त में निकलेगा तेल
है कि नहीं आज तो अखबार वालों ने जोरदार खबर दी है। कंपनी वाले तो पहले ही कह चुके हैं कि हमारी तैयारी पूरी है। यही बात दोहराई है। कम्पनी के मुताबिक फिलहाल 30 हजार बैरल रोजाना के उत्पादन एवं परिवहन की योजना है, लेकिन इस साल के आखिर तक 50 हजार बैरल प्रतिदिन की क्षमता जुटा ली जाएगी। बाड़मेर से गुजरात के सलाया तट तक जाने वाली पाइप लाइन का कार्य भी इसी अवधि में पूरा हो जाएगा। 600 किलोमीटर लम्बी पाइपलाइन में से 520 किलोमीटर पाइपलाइन की वेल्डिंग पूरी हो गई है तथा 400 किमी तक पाइप बिछा दिए गए हैं। गुजरात में वीरमगाव टर्मिनल पर पाइप लाइन का कार्य 90 फीसदी काम पूरा हो गया है।
Sunday, July 26, 2009
जैसलमेर में भी गुड-न्यूज
ली के एक "बादशाह" ने कल ही इत्तला दी। बोले- जैसलमेर के लिए भी "गुड न्यूज" है। राज्य सरकार ने जैसलमेर स्थित दो तेल क्षेत्रों आरजे-ओएनएन-2005/1 और आरजे-ओएनएन-2005/2 के लिए पेट्रोलियम अन्वेषण लाइसेंस जारी कर दिया है। इसके तहत हिन्दुस्तान ऑयल एक्सप्लोरेशन कम्पनी लिमिटेड (एचओईसी) को इन दोनों ब्लॉक में तेल-गैस खोज करेगी। तकरीबन ढाई दशक से भी ज्यादा समय से यह कम्पनी तेल-गैस खोज के क्षेत्र में कार्य कर रही है। इस क्षेत्र में आने वाली देश की यह पहली निजी कम्पनी भी है। एचओईसी को न्यू एक्सप्लोरेशन लाइसेंसिंग पालिसी (नेल्प) के सातवें चरण में यह ब्लॉक आवंटित हुए थे। इसमें आरजे-ओएनएन-2005/1 ब्लॉक 1 हजार 424 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, वहीं आरजे-ओएनएन-2005/2 ब्लॉक का क्षेत्रफल 1 हजार 518 वर्ग किलोमीटर तक है।दोनों ब्लॉक में क्रमश: 20 एवं 25 फीसदी की हिस्सेदार रखने वाली एचओईसी जहां एक ब्लॉक की संचालक भी खुद ही है, वहीं दूसरे ब्लॉक आरजे-ओएनएन-2005/2 में ऑयल इण्डिया को ऑपरेटर बनाया गया है। एचओईसी फिलहाल देश के सात तेल-गैस क्षेत्रों में अन्वेषण एवं उत्पादन कर रही है। इसमें कावेरी, काम्बे एवं असम-अरकान बेसिन शामिल हैं। सरकार ने नेल्प-7 के कायदों के मुताबिक एचओईसी को सात साल के लिए इन दोनों ब्लॉक की जिम्मेदारी सौंपी है। इसके लिए कम्पनी के लाइसेंस की वैधता गत 13 जुलाई से मानी जाएगी। कम्पनी अब यहां तकनीकी परीक्षण एवं सर्वे के माध्यम से तेल के भण्डारों का पता लगाएगी। Friday, July 10, 2009
करोड़ों का हुआ 'कबाड़ा'
भगवान जाने, हमारे तेल को किसकी नजर लग गई है। ना सरकार मान रही है और ना ही कम्पनियां। बाड़मेर से निकलने वाले कच्चे तेल पर वैट वसूली की खींचतान के कारण तेल उत्पादन में ही देरी नहीं हो रही, अब तो सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व से भी हाथ धोना पड़ रहा है। बीते दो महीनों में ही राजस्थान सरकार तकरीबन 500 करोड़ रुपए का राजस्व गंवा चुकी है। तेल मण्डली के एक 'तेली' ने बताया कि केयर्न इण्डिया ने तो पिछले मई महीने में ही तेल निकालने की तकनीकी तैयारी पूरी कर ली थी। कम्पनी की मई से ही दोहन शुरू करने की योजना भी थी। लेकिन जब सरकार ने इस तेल पर चार फीसदी वैट मांगा तो मामला अटक गया। 'तेली भाई' के अनुसार केयर्न इण्डिया एवं तेल की खरीदार कम्पनियां इस पर दो प्रतिशत सीएसटी (केन्द्रीय बिक्री कर) वसूलने का आग्रह कर रहीं हैं।
इसी खींचतान में राजस्थान की सरकार के हाथ से 500 करोड़ रुपए फिसल गए हैं। 'गणितज्ञ तेलियों' के अनुसार बाड़मेर से अगर मई में तेल उत्पादन शुरू हो जाता तो जून तक दो माह में राज्य सरकार को 500 करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता था। हकीकतन, मई में करीब 10 हजार बैरल प्रतिदिन तेल निकलने का अनुमान था, जो जून के आखिर तक बढ़ते-बढ़ते रोजाना 30 हजार बैरल तक पहुंच जाता। इस पर 65 डॉलर प्रति बैरल के अंतरराष्ट्रीय मूल्य से गणना करने पर राज्य सरकार को 10 से 12 करोड़ रुपए प्रतिदिन बतौर रॉयल्टी और बिक्री कर के रूप में मिल सकते थे।
पंगा यह है कि...
बाड़मेर में तेल खरीद केन्द्र होने के कारण राज्य सरकार यहां से निकलने वाले तेल पर चार फीसदी वैट मांग रही है, जबकि तेल खरीदार कम्पनियां और केयर्न इण्डिया अन्तरराज्यीय बेचान होने की वजह से केन्द्रीय बिक्री कर (सीएसटी) लगाने का आग्रह कर रही हैं। केयर्न ने इसके लिए सरकार के समक्ष कानूनी नजीरें भी पेश की हैं। उधर, वैट का मामला उलझने से कच्चे तेल का बिक्री-करार (कोसा) भी अटक गया है। फिलहाल यह मामला राजस्थान के अखबारों की सुर्खियां बना हुआ है।
- गंगू-तेली
Monday, July 6, 2009
कुण्डली (कविता)
'मंगला' पर 'शनि की दशा'
लगता है राजस्थान के मंगल तेल क्षेत्र पर शनि की दशा चल रही है। तारीख पर तारीख पड़ती जा रही है, पर तेल दोहन है कि शुरू होने का नाम ही नहीं ले रहा। तकनीकी रूप से तैयार होने के बावजूद केयर्न इण्डिया का जल्दी-उत्पादन शुरू करने का मंसूबा भी पूरा नहीं पाया। राज्य सरकार और कम्पनी के बीच वैट मामले को लेकर गतिरोध के चलते अभी भी इस मामले में तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। हालांकि पहले-पहले मई के आखिरी हफ्ते से तेल दोहन शुरू करने की कवायद चल रही थी। इस बारे में कम्पनी ने सीधे-सीधे तो ऐलान नहीं किया था, पर कई बार ऐसे संकेत दिए। इतना ही नहीं बाड़मेर के नगाणा स्थित मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल (एमपीटी) के तकनीकी रूप से तैयार होने में देरी को देखते हुए स्टार्ट-अप प्रोडक्शन पैकेज (सप) भी विकसित किया गया। इसमें कच्चे तेल से पानी एवं मिट्टïी के अंश अलग करने वाले छोटे सैपरेटर, बॉयलर एवं लोडिंग-बे समेत अन्य उपकरण लगाए गए, लेकिन राज्य सरकार की ओर से उत्पादित तेल पर स्थानीय कर यानी वैट की मांग के चलते इसमें रोड़ा अटक गया। अब कम्पनी और सरकार के बीच इस मुद्दे पर उच्चस्तरीय बातचीत का दौर जारी है, लेकिन मामला निर्णायक स्तर पर नहीं पहुंचा है।
'फल' रही है 'वाचा'
तेल दोहन शुरू करने के मामले में केयर्न की 'वाचा' फलीभूत हो रही है। कम्पनी ने शुरू में ही वर्ष 2009 की तीसरी तिमाही से तेल दोहन शुरू करने की घोषणा कर दी थी। मई में उत्पादन की तैयारी पूरी करने के बाद भी केयर्न ने इस पर जुबान नहीं खोली। आखिर अब शीघ्र तेल दोहन शुरू करने की इच्छा के बावजूद देरी का मुंह देखना पड़ रहा है।
कयासों का दौर
दोहन शुरू होने को लेकर अब भी कयास ही लग रहे हैं। जून का महीना भी सूखा गुजरने के बाद अब जुलाई दूसरे पखवाड़े से तेल दोहन शुरू होने की चर्चा है। वैसे, कम्पनी वाले तो अभी भी कुछ नहीं बोल रहे। अपने राम को यही चिंता है कि आखिर होगा क्या...?
जय राजा भोज की...
- गंगू-तेली
